इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर हवा का रिसाव:इमरजेंसी में अंतरिक्ष यात्रियों को वापस लाने की तैयारी, नासा ने चारों एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस क्राफ्ट में भेजा

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के रूसी हिस्से में हवा का रिसाव (एयर लीक) बढ़ने के बाद नासा ने वहां मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों को अपने स्पेसक्राफ्ट में छिपने और संभावित सुरक्षित निकलने (इवैक्युएशन) के लिए तैयार रहने का आदेश दिया है। रूसी चालक दल फिलहाल इस लीक को ठीक करने की कोशिश कर रहा है। क्रू-12 मिशन के यात्रियों को मिला स्पेससूट पहनने का आदेश नासा के अनुसार, स्टेशन पर मौजूद 'क्रू-12' मिशन के 4 अंतरिक्ष यात्रियों को नासा मिशन कंट्रोल से शुक्रवार सुबह 9:04 बजे (ET) यह निर्देश मिला। इनमें दो अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री जैक हैथवे और जेसिका मीर, एक फ्रांसीसी अंतरिक्ष यात्री सोफी एडेनोट और एक रूसी अंतरिक्ष यात्री आंद्रेई फेदयेव शामिल हैं। उन्हें स्टेशन से जुड़े 'क्रू ड्रैगन' स्पेसक्राफ्ट के अंदर जाने और अपने स्पेससूट पहनने के लिए कहा गया है, ताकि एयर लीक बढ़ने पर आपातकालीन स्थिति में वहां से तुरंत निकला जा सके। रूस के 'ज्वेज्दा सर्विस मॉड्यूल' में हो रहा है रिसाव स्पेस स्टेशन के दो मुख्य संचालक- नासा और रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस- पिछले कई महीनों से रूस के 'ज्वेज्दा सर्विस मॉड्यूल' में हो रहे छोटे हवा के रिसाव के कारणों और उनके संभावित समाधानों पर चर्चा कर रहे हैं। फुटबॉल के मैदान के आकार की इस पूरी प्रयोगशाला (ISS) में यह मॉड्यूल एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। एक दिन में लीक डबल हुआ, 1 पाउंड से बढ़कर 2 पाउंड नुकसान हुआ नासा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हाल के महीनों में यह एयर लीक काफी कम था। लेकिन सोमवार को स्थिति अचानक तब बिगड़ गई, जब लीक होने वाली हवा की मात्रा रोजाना एक पाउंड से बढ़कर दो पाउंड (लगभग दोगुनी) हो गई। इसी वजह से नासा को यात्रियों की सुरक्षा के लिए यह अलर्ट जारी करना पड़ा। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन क्या है? इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पृथ्वी के चारों ओर घूमने वाला एक बड़ा अंतरिक्ष यान है। इसमें एस्ट्रोनॉट रहते हैं और माइक्रो ग्रेविटी में एक्सपेरिमेंट करते हैं। यह 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रैवल करता है। यह हर 90 मिनट में पृथ्वी की परिक्रमा पूरी कर लेता है। 5 स्पेस एजेंसीज ने मिलकर इसे बनाया है। स्टेशन का पहला पीस नवंबर 1998 में लॉन्च किया गया था। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें… स्पेस स्टेशन में 18 दिन रहकर लौटे शुभांशु: स्पेसक्राफ्ट की लैंडिंग कैलिफोर्निया के तट पर हुई, पहली बार कोई भारतीय ISS गया था शुभांशु शुक्ला सहित चार एस्ट्रोनॉट स्पेस स्टेशन में 18 दिन रहने के बाद पृथ्वी पर लौट आए हैं। करीब 23 घंटे के सफर के बाद ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट की आज यानी 15 जुलाई को दोपहर 3 बजे कैलिफोर्निया के तट पर लैंडिंग हुई। इसे स्प्लैशडाउन कहते हैं। चारों एस्ट्रोनॉट एक दिन पहले यानी सोमवार की शाम 4:45 बजे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से पृथ्वी के लिए रवाना हुए थे। पूरी खबर पढ़ें…

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