देश में हाईवे पर मोबाइल नेटवर्क की समस्या बनी हुई है। सीएमआर की रिपोर्ट के मुताबिक, हाईवे पर सफर करने वाले 79% स्मार्टफोन यूजर्स को कॉल ड्रॉप या नेटवर्क बाधा का सामना करना पड़ता है। कामकाज पर असर 64% बिजनेस यूजर्स ने कहा- कॉल ड्रॉप की वजह से क्लाइंट डील गंवाई। हर 3 में से 2 यूजर्स बोले- खराब सिग्नल से क्लाइंट खोना पड़ा। 71% को ग्राहक को दोबारा फोन करना पड़ा, इससे प्रोफेशनल इमेज खराब हुई। मानसिक दबाव भी बढ़ा 83% ने कहा- जरूरी कॉल कटने से बेचैनी-लाचारी महसूस होती है। लगातार नेटवर्क टूटने से तनाव व असुरक्षा की भावना बढ़ रही। मेट्रो व इंडोर लो-सिग्नल जोन में स्थिर कनेक्टिविटी चुनौती है। फोन डिजाइन का असर ट्रिपल-सिग्नल चिपसेट से लैस फोन वाले 81% ने बेहतर नेटवर्क अनुभव की बात कही। 74% यूजर्स को हाईवे यात्रा के दौरान कॉलिंग ज्यादा भरोसेमंद लगी। क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
साइबर मीडिया रिसर्च (CMR) के इंडस्ट्री रिसर्च ग्रुप के वाइस प्रेसिडेंट, प्रभु राम ने कहा, “भारत ने मोबाइल नेटवर्क की कवरेज बढ़ाने में बहुत अच्छी तरक्की की है। इसके बावजूद हाईवे, मेट्रो और कमजोर सिग्नल वाले इनडोर इलाकों में लगातार अच्छी कनेक्टिविटी मिलना आज भी एक बड़ी चुनौती है।” क्या फोन की तकनीक से सुधर सकता है नेटवर्क? रिपोर्ट में एक दिलचस्प बात यह भी सामने आई है कि आपके फोन का डिजाइन और उसकी टेक्नोलॉजी भी नेटवर्क पकड़ने में अहम भूमिका निभाती है। हाईवे पर अक्सर सफर करने वाले जिन यूजर्स ने ट्रिपल-सिग्नल चिपसेट वाले फोन पर स्विच किया, उनमें से 81% ने बताया कि उनका नेटवर्क एक्सपीरियंस पहले से बेहतर हो गया। 74% यूजर्स को कॉलिंग में ज्यादा भरोसा दिखा और 72% ने माना कि खराब नेटवर्क वाले इलाके से बाहर निकलते ही उनके फोन ने बहुत तेजी से सिग्नल रिकवर कर लिया।
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