नासा के 2028 तक इंसानों को फिर से चंद्रमा पर भेजने के मिशन को झटका लग सकता है। अमेरिकी ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, ‘एक्जिओम स्पेस’ के नए स्पेस सूट तैयार होने में 2031 तक की देरी हो सकती है। हालांकि, नासा एडमिनिस्ट्रेटर जेरड इसाकमैन ने भरोसा जताया है कि 2028 तक अंतरिक्ष यात्री इन्हीं सूट्स में चांद पर उतरेंगे। जानें स्पेस सूट की खासियतें। - इटली की फैशन कंपनी ‘प्राडा’ भी नासा के नए स्पेस सूट को बनाने के प्रोजेक्ट में जुड़ी है। उसने सूट के फैब्रिक व डिजाइन पर काम किया है। नासा के नए एक्सईएमयू की 7 खास बातें - लिक्विड कूलिंग सिस्टम - सूट के अंदर ‘लिक्विड कूलिंग’ सिस्टम वाला खास अंडरगारमेंट होगा, जो शरीर का तापमान नियंत्रित रखेगा।
- स्मार्ट शूज - खास ‘स्मार्ट’ जूते चांद की सतह पर अच्छी ग्रिप देंगे। पिछले मिशन की तरह उछलकर चलने की जरूरत नहीं होगी।
- वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम - 8 घंटे का टॉयलेट बैकअप रहेगा। यानी सूट उतारे बिना काम कर सकेंगे। माइनस 2000 तक ठंड में भी सुरक्षित रखेगा। - फैब्रिक - चंद्रमा की धूल कांच के टुकड़ों की तरह नुकीली और चिपकने वाली होती है। सूट का बाहरी फैब्रिक चांद की महीन धूल को कम चिपकने देगा। - रियर एंटी सिस्टम - नए सूट में ‘रियर एंट्री’ सिस्टम होगा। यानी अंतरिक्ष यात्री पीछे की तरफ से सूट में प्रवेश करेंगे। इसे पहनना और उतारना आसान होगा। - विशेष सूट - अपोलो मिशन के समय सूट पुरुषों के हिसाब से ही बने थे। नए सूट को पुरुष और महिला दोनों अंतरिक्ष यात्री पहन सकेंगे। - स्मार्ट हेलमेट - हेलमेट में एचडी कैमरा, लाइट्स और 4जी/एलटीई कम्युनिकेशन सिस्टम होगा, जिससे संपर्क और रिकॉर्डिंग बेहतर होगी। आर्टेमिस-3 मिशन के लिए सूट बनने में देरी क्यों हो रही? नया स्पेस सूट ऐसा बनाना है, जो चंद्रमा की सतह व अंतरिक्ष की भारहीन स्थिति में काम कर सके। 2022 में नासा ने ‘एक्सिओम स्पेस’ और ‘कॉलिन्स एयरोस्पेस’ को यह प्रोजेक्ट दिया था, लेकिन बाद में कॉलिन्स इससे अलग हो गई। अब ‘एक्सिओम स्पेस’ कंपनी पर पूरे प्रोजेक्ट का भार है, जिसकी वजह से टेस्टिंग और डेवलपमेंट में देरी हो रही है। क्या है आर्टेमिस-3 मिशन इसमें अंतरिक्ष यात्रियों को पहली बार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारा जाएगा। उद्देश्य वहां स्थायी बेस बनाना है।
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