बीते दो वर्षों से टेक इंडस्ट्री में नारा गूंज रहा है...‘एआई जल्द ही सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की जगह ले लेगा और कंपनियों का खर्च आधा हो जाएगा।’ इस वादे ने शेयर बाजार को आसमान पर पहुंचा दिया, कंपनियों ने बड़े पैमाने पर छंटनी की और करोड़ों रुपए एआई इन्फ्रा खर्च कर दिए। पर, जब इन टूल्स को काम पर लगाया गया, तो जो इनवॉइस सामने आई उसने दिग्गज कंपनियों को हिला दिया। सबसे बड़ा झटका माइक्रोसॉफ्ट को लगा। कंपनी ने एंथ्रोपिक में 48 हजार करोड़ रु. निवेश किए और अपने 1 लाख इंजीनियरों को ‘क्लॉड कोड’ का एक्सेस दे दिया। उम्मीद थी कि उत्पादकता बढ़ेगी, पर हर शब्द पर भुगतान की मजबूरी ने लागत को बेकाबू कर दिया। इस वजह से जून तक सभी लाइसेंस रद्द कर दिए गए व इंजीनियरों को माइक्रोसॉफ्ट के इन-हाउस टूल पर शिफ्ट करना पड़ा। उबर ने दिसंबर 2025 में अपने 5,000 इंजीनियरों को क्लॉड कोड दिया। 84% डेवलपर्स इसका इस्तेमाल करने लगे और 70% कोड एआई से आने लगा। नतीजा यह हुआ कि इंजीनियर हर महीने 47 हजार से 1.9 लाख रुपए का व्यक्तिगत बिल बनाने लगे। एक सीटीओ ने तो दो घंटे के डेमो में 1.1 लाख रु. खर्च कर दिए। अप्रैल तक ही उबर ने 2026 का पूरा एआई बजट खत्म कर दिया। एनवीडिया ने भी माना कि उनकी टीम के लिए कंप्यूटिंग की लागत कर्मचारियों की सैलरी से ज्यादा हो गई है। दरअसल, साधारण एआई लगभग मुफ्त हो चुका है, पर गंभीर कोडिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले टॉप-टियर एआई के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ओपनएआई ने नया मॉडल दोगुने दाम पर उतारा, जबकि एंथ्रोपिक ने टेक्स्ट गिनने का तरीका बदल दिया, जिससे बिल बढ़ने लगा। बेजोस बोले- यह संकट नहीं ‘एआई बबल’ के डर को खारिज करते हुए अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस ने कहा कि यह संकट नहीं, बल्कि ‘सदी में एक बार मिलने वाला सबसे बड़ा अवसर’ है। वहीं, सॉफ्टबैंक के प्रमुख मासायोशी सन 9.5 लाख करोड़ रु. का नया एआई फंड ‘प्रोजेक्ट इजा नागी’ लॉन्च कर रहे हैं। उनका तर्क है कि आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस कुछ वर्षों में इंसानी दिमाग से 10 गुना ज्यादा स्मार्ट हो जाएगा। एआई में बिग टेक का महा निवेश...एंथ्रोपिक की बादशाहत माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, मेटा व अमेजन इस साल एआई इन्फ्रा पर रिकॉर्ड 69 लाख करोड़ रु. खर्च कर रहे हैं। गार्टनर के अनुसार, वैश्विक एआई खर्च 240 लाख करोड़ रु. हो जाएगा। माइक्रोसॉफ्ट का एआई बिजनेस 3.53 लाख करोड़ के रन रेट (अनुमानित लाभ) पर है, जबकि गूगल का क्लाउड बैकलॉग 43.93 लाख करोड़ रु. पार कर चुका है। एंथ्रोपिक ने इस साल 2.86 लाख करोड़ के दो फंडिंग राउंड पूरे किए, जिससे वैल्यूएशन 86 लाख करोड़ हो गई है। वहीं रिलायंस ग्रुप 7 वर्षों में भारत के एआई इन्फ्रा पर ₹10 लाख करोड़ निवेश करेगा। एक कॉल और एआई कानून ध्वस्त अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ऐसे सरकारी आदेश पर साइन करने वाले थे, जिसके तहत सरकार को शक्तिशाली एआई मॉडल के लॉन्च से पहले 90 दिनों तक उसकी सुरक्षा जांच का हक मिलता। इसके लिए टेक दिग्गज (ऑल्टमैन, पिचाई, नडेला) वॉशिंगटन पहुंच चुके थे। लेकिन ऐन वक्त पर, ट्रम्प के पूर्व सलाहकार और 449 एआई कंपनियों में भागीदार डेविड साक्स ने राष्ट्रपति को फोन किया और तर्क दिया कि नियमों से एआई डेवलपमेंट धीमा होगा व चीन बाजी मार ले जाएगा। मस्क-जुकरबर्ग ने भी यही दबाव बनाया। नतीजतन ट्रम्प ने आदेश रद्द कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि कानून स्वैच्छिक था, फिर भी टेक दिग्गजों ने महज 12 घंटे में महीनों की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पलटवा दी।
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