आईटी इंडस्ट्री के लिए बीता महीना विरोधाभासी रहा। नैसकॉम ने वित्त वर्ष के अंत तक रिकॉर्ड 30 लाख करोड़ रुपए राजस्व का अनुमान जताया, जो 6% की वृद्धि है। दूसरी तरफ, एआई द्वारा नौकरियां खत्म करने की आशंका से शेयरों में बिकवाली हो रही है। निफ्टी आईटी इंडेक्स 20% से ज्यादा टूट चुका हैै। निराशा की वजह स्पष्ट है- दशकों से यह उद्योग ‘लेबर आर्बिट्रेज’ पर टिका है, जहां पुणे में कोडर रखने की लागत अमेरिका के मुकाबले बेहद कम है। इंफोसिस, टीसीएस जैसी फर्में कोडर्स की मदद से सॉफ्टवेयर मेंटेनेंस और रूटीन कोडिंग जैसे श्रम-प्रधान कार्यों से राजस्व कमाती हैं। एआई बनाम कोडर एंथ्रोपिक का ‘क्लॉड कोड’ मिनटों में प्रोटोटाइप बना सकता है। टेक महिंद्रा के सीइओ अतुल सोनेजा का तर्क है कि उत्पादकता में सुधार केवल ‘ग्रीनफील्ड’ (नए) माहौल में संभव है। विरासत में मिले पुराने कोड और जटिल प्रणालियों वाले ‘ब्राउनफील्ड’ में एआई तैनात करना कठिन है। अक्सर क्लाइंट्स को अहसास होता है कि एआई सपने महत्वाकांक्षी थे। वे अंततः पहले जितने ही कोडर्स रखते हैं।’ अवसर और वास्तविकता इंफोसिस के फाउंडर्स में से एक नंदन नीलेकणी का अनुमान है कि एआई संबंधित सेवाओं का मूल्य 2030 तक 300-400 अरब डॉलर हो सकता है। हालिया नतीजे उम्मीद जगा रहे हैं। टीसीएस की एआई बिक्री 17% बढ़ी और राजस्व का 6% है। एचएसबीसी के योगेश अग्रवाल के अनुसार, ‘पारंपरिक सॉफ्टवेयर को एआई द्वारा निगल जाने के दावों के ठोस मामले बहुत कम हैं।’ जीसीसी की भूमिका ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) भी टेक वर्कर्स को रोजगार दे रहे हैं। चूंकि कंपनियां अब तकनीक को व्यवसाय का कोर मानती हैं, इसलिए एआई की मदद से इन-हाउस कोडिंग बढ़ने से भी भारतीय आईटी उद्योग को लाभ होगा। नवंबर 2022 में चैटजीपीटी के आने के बाद जिस ‘विघटन’ की आशंका थी, वह तीन साल बाद भी नहीं आया है। राजस्व बढ़ रहा है और नियुक्तियां जारी हैं। वाजिब हुए दाम; एआई के साथ ‘रीसेट मोड’ में इंडस्ट्री साल 2026 में आईटी सेक्टर पर काफी दबाव देखा गया है। आईटी इंडेक्स पीक से 28% टूट चुका है। मार्केट एनालिस्ट के मुताबिक आईटी सेक्टर खत्म नहीं हो रहा, बल्कि ‘रीसेट फेज’ में है। •वैल्युएशन में बदलाव: वर्तमान में आईटी सेक्टर का वैल्युएशन इसके दो साल की अनुमानित कमाई का 15.4 गुना (15.4x) है। •बेंचमार्क के बराबर: आईटी सेक्टर हमेशा निफ्टी 50 इंडेक्स से लगभग 17% प्रीमियम (महंगा) पर ट्रेड करता था, लेकिन अब यह निफ्टी 50 के बराबर आ गया है। इसे ही ‘वैल्यू जोन’ कहा जा रहा है क्योंकि अब शेयरों में छाई ‘अतिरिक्त चमक’ खत्म हो गई है। सलाह: वर्तमान दौर में ‘बॉटम फिशिंग’ यानी निचले स्तर पर खरीदारी से बचें। जब तक अर्निंग्स में सुधार के संकेत न मिलें, तब तक इंतजार करना समझदारी। ग्रोथ आउटलुक: धीमी लेकिन स्थिर •चिंताओं के बावजूद, सेक्टर पूरी तरह ध्वस्त नहीं हो रहा है। उद्योग की वार्षिक आय वृद्धि 3% से 6% रहने की उम्मीद है। यह इसके ऐतिहासिक औसत (7% - 8%) से कम है। आईटी कंपनियां कैसे खुद को बदल रही हैं? •नया मॉडल: कंपनियां ‘फिक्स्ड-प्राइस’ कॉन्ट्रैक्ट की ओर बढ़ रही हैं और प्रति कर्मचारी लाभ सुधार रही हैं। •कार्यबल: एआई-कुशल प्रतिभाओं को ऊंचे वेतन पर नियुक्त किया जा रहा है और मौजूदा कर्मचारियों को ‘री-स्किल’ किया जा रहा है। •साझेदारी: कंपनियां एआई-नेटिव कंपनियों के साथ पार्टनरशिप कर रही हैं। एआई के आगे कैसे टिकी आईटी इंडस्ट्री एआई से काम करवाना मुख्य उद्देश्य होगा। पुरानी प्रणालियों को आधुनिक बनाना कठिन है क्योंकि उनमें डेटा साइलो और तकनीकी कमियां होती हैं। -नंदन नीलेकणी, को-फाउंडर, इंफोसिस ( एआई इंपैक्ट)
from टेक - ऑटो | दैनिक भास्कर https://ift.tt/xTuCyDO
from टेक - ऑटो | दैनिक भास्कर https://ift.tt/xTuCyDO