मेडिकल साइंस में पहली बार दो ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने सूअरों का सफल ऑपरेशन किया है। 'सर्जी' निकनेम वाले इन रोबोट्स ने सूअरों के पेट से गॉलब्लेडर को सुरक्षित बाहर निकाला। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों और इंजीनियर्स का यह प्रयोग मेडिकल दुनिया में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। सबसे खास बात यह है कि इसके लिए कोई स्पेशल रोबोट नहीं बनाया गया था। डॉक्टरों ने बाजार में मिलने वाले दो आम रोबोट्स का इस्तेमाल किया। इन रोबोट्स की लंबाई करीब 4 से 5 फीट है और इनकी कीमत 20,000 डॉलर यानी करीब ₹19 लाख से भी कम है। दो रोबोट्स ने अकेले पूरी की लैप्रोस्कोपिक सर्जरी रोबोट्स ने सूअरों पर लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टोमी यानी गालब्लैडर निकालने की जटिल प्रक्रिया को पूरा किया। इस दौरान रोबोट्स ने बेहद सटीकता के साथ टिश्यूज को हटाया, उनकी जांच और डिसेक्शन किया, क्लिपिंग की और लिवर बेड से गालब्लैडर को सुरक्षित रूप से उठाकर बाहर निकाल दिया। दो अलग-अलग तरीके से एक्सपेरिमेंट किया खास टूल और एडवांस्ड सॉफ्टवेयर से मदद मिली ह्यूमनॉइड रोबोट्स को इस सर्जरी के काबिल बनाने के लिए रिसर्च टीम ने खास फिजिकल एडॉप्टर तैयार किए, ताकि रोबोट्स सर्जिकल टूल्स को मजबूती और सटीकता से पकड़ सकें। इसके साथ ही एक खास सॉफ्टवेयर भी डेवलप किया गया। यह सॉफ्टवेयर इंसानी हाथों के इशारों और मूवमेंट को सुचारू रूप से ट्रांसलेट करके रोबोट की कलाई से जुड़े सर्जिकल टूल्स को कंट्रोल करता है। डॉक्टरों की अनुपस्थिति में भी इलाज पहुंचाना मकसद इस सफल सर्जरी की पूरी डिटेल 8 जुलाई को साइंस जर्नल 'नेचर' में पब्लिश की गई है। यूनिवर्सिटी के मुताबिक, यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहा है। इस टेस्टिंग से भविष्य में दूरदराज के इलाकों या डॉक्टरों की अनुपस्थिति में भी मरीजों को तुरंत बेहतर इलाज और सर्जरी की सुविधा मिलने की उम्मीद है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो के 'सेंटर फॉर द फ्यूचर ऑफ सर्जरी' के अंतरिम निदेशक डॉ. रयान ब्रोडेरिक ने बताया कि एक 'प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट' के रूप में यह एक्सपेरिमेंट पूरी तरह से सफल रहा है। नॉलेज पार्ट: लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टोमी क्या होती है?
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